कृष्ण सुदामा चरित्र प्रसंग पर श्रद्धालु भाव विभोर हो उठे

विवेकानंद नगर में आयोजित भागवत कथा के दौरान

गाजियाबाद। विवेकानंद नगर स्थित मानव संस्कार केंद्र स्कूल मे चल रही श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान की अमृत वर्षा कथा व्यास साध्वी निकुंज प्रिया मंजरी  जी ने संगीतमय कथा वाचन कर सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि, मित्रता करो, तो भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा जैसी करो। सच्चा मित्र वही है, जो अपने मित्र की परेशानी को समझे और बिना बताए ही मदद कर दे। परंतु आजकल स्वार्थ की मित्रता रह गई है। जब तक स्वार्थ सिद्ध नहीं होता है, तब तक मित्रता रहती है। जब स्वार्थ पूरा हो जाता है, मित्रता खत्म हो जाती है।
 कथा के दौरान श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि एक सुदामा अपनी पत्नी के कहने पर मित्र कृष्ण से मिलने द्वारकापुरी जाते हैं। जब वह महल के गेट पर पहुंच जाते हैं, तब प्रहरियों से कृष्ण को अपना मित्र बताते है और अंदर जाने की बात कहते हैं। सुदामा की यह बात सुनकर प्रहरी उपहास उड़ाते है और कहते है कि भगवान श्रीकृष्ण का मित्र एक दरिद्र व्यक्ति कैसे हो सकता है। प्रहरियों की बात सुनकर सुदामा अपने मित्र से बिना मिले ही लौटने लगते हैं। तभी एक प्रहरी महल के अंदर जाकर भगवान श्रीकृष्ण को बताता है कि महल के द्वार पर एक सुदामा नाम का दरिद्र व्यक्ति खड़ा है और अपने आप को आपका मित्र बता रहा है।
द्वारपाल की बात सुनकर भगवान कृष्ण नंगे पांव ही दौड़े चले आते हैं और अपने मित्र सुदामा को रोक कर गले लगा लिया लोग समझ नहीं पाए कि आखिर सुदामा मे क्या खासियत है कि भगवान खुद ही उनके स्वागत में दौड़ पड़े श्री कृष्ण ने स्वयं सिंहासन पर बैठकर सुदामा के पांव पखारे कृष्ण सुदामा चरित्र प्रसंग पर श्रद्धालु भाव विभोर हो उठे।
 भगवान दत्तात्रेय ने 24 गुरु बनाए। वे कहते थे कि जिस किसी से भी जितना सीखने को मिले, हमें अवश्य ही उन्हें सीखने का प्रयत्न अवश्य करना चाहिए। उनके 24 गुरुओं में कबूतर, पृथ्वी, सूर्य, पिंगला, वायु, मृग, समुद्र, पतंगा, हाथी, आकाश, जल, मधुमक्खी, मछली, बालक, कुरर पक्षी, अग्नि, चंद्रमा, कुमारी कन्या, सर्प, तीर (बाण) बनाने वाला, मकडी़, भृंगी, अजगर और भौंरा (भ्रमर) हैं।कथा व्यास साध्वी निकुंज प्रिया मंजरी जी ने सुदामा चरित्र एवं गुरु की महिमा की कथा का वर्णन करते हुए कि जीवन में गुरु का होना आवश्यक है गुरु हमारे जीवन की दशा एवं दिशा दोनों को बदलते है लेकिन हमें दुख इस बात का है कि हम गुरु को बहुत मानते है लेकिन गुरु की बातों को नही मानते। इसी कारण हम दुखी होते है गुरु मिलने से हमारा नया जन्म होता है। गुरु से मार्ग दर्शन एवं गुरु ही हमारे कष्टों को दूर करता है। उन्होंने कहा कि हम भले ही सुदामा हो लेकिन मित्र कृष्ण जैसा ही बनाना चाहिए।
कथा व्यास ने कहा कि जो व्यक्ति सच्चे मन से भागवत कथा का श्रवण करता है उसका संबंध कृष्ण से अपने आप ही जुड़ जाता है तथा कृष्ण की कृपा उन पर सदा बनी रहती है और उस व्यक्ति पर कलयुग भी अपना प्रभाव नहीं जमा पाता। कथा में कृष्ण भगवान की सोलह हजार एक सौ आठ विवाहों का वर्णन किया। व शुकदेव जी की विदाई, व्यास पीठ पूजन के साथ कथा पूर्ण की गई। मधुर भजन पर श्रोता आनंदित रहे।
 आज कथा में श्री रामलीला कमेटी कविनगर के अध्यक्ष ललित जायसवाल ने व्यास जी का अभिनंदन किया । मुख्य यजमान संजीव श्रीवास्तव व उनकी धर्म पत्नी पतांजलि योग पीठ महिला कमेटी की जिला अध्यक्ष ड़ा.शशि श्रीवास्तव रही। पार्षद राजकुमार नागर , सचिन सोनी,प्रेमपाल,सुनील चौधरी,पूनम चौधरी, प्रिया शर्मा,सरोज,अवध बिहारी उपाध्याय,पुष्कर नाथ पांडेय आदि उपस्थित रहे।
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 वरिष्ठ पत्रकार श्री राम की रिपोर्ट

 

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