गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर जिला प्रशासन द्वारा आयोजित कवि सम्मेलन

दुआ सबको ये दूं तुमको किसी से प्यार हो जाए

गाजियाबाद। लोहिया नगर स्थित हिंदी भवन में गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर जिला प्रशासन गाजियाबाद और हिंदी भवन समिति की तरफ से एक कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमे जाने-माने रचनाकारों ने अपनी रचनाओं में जहां शहीदों को याद किया, वहीं समाज में दिखाई दे रही विभिन्न विसंगतियों पर भी तीखा प्रहार किया।

लोहिया नगर स्थित हिंदी भवन में मुख्य अतिथि सीडीओ अभिनव गोयल एवं हिंदी भवन के पदाधिकारियों और वरिष्ठ रचनाकारों ने दीप जला कर कार्यक्रम की शुरुआत की। इस अवसर पर हिंदी भवन समिति के अध्यक्ष एवं चीफ सिविल वार्डन ललित जायसवाल ने कहा कि देश को आजादी दिलाने वाले शहीदों की कुर्बानी कभी भुलाई नहीं जा सकती। उनकी देशभक्ति हम लोगों में भी बनी रहे, इसके लिए समय-समय पर उन्हें याद किया जाना जरूरी है।

कवि सम्मेलन की अध्यक्षता प्रसिद्ध शायर विजेंद्र सिंह परवाज ने की जबकि संचालन डॉ प्रवीण शुक्ल ने किया। विजेंद्र सिंह परवाज को इन शेरो पर बहुत दाद मिली-

ये जिंदगी भी कैसे बहाने में कट गई
जैसा नहीं हूं वैसा दिखाने में कट गई
बर्दाश्त किसको होती हैं खुद्दारियां यहां
गरदन हमारी सर को उठाने में कट गई।

सुप्रसिद्ध कवि एवं मंच संचालक डॉ प्रवीण शुक्ल की ये पंक्तियाँ बहुत सराही गईं-
खरे करता है सारे काम, कुछ खोटा नहीं करता
अहम का अपने चारों ओर, परकोटा नहीं करता
बड़ा है आदमी सच में वही किरदार से अपने
जो अपने सामने वाले का कद छोटा नहीं करता

शायर राज कौशिक को इस ग़ज़ल पर लोगों ने जम कर दाद दी-

मैं इस हद तक मोहब्बत का हूं पैरोकार अब यारो,
कोई समझे मुझे दुश्मन तो मेरी हार हो जाए,,
खुदा मेरी दुआओं में असर पैदा अगर कर दे,
दुआ सबको ये दूं तुमको किसी से प्यार हो जाए,,

अलीगढ़ से आई मुमताज़ नसीम की ये ग़ज़ल बहुत पसन्द की गई-

मुझको मालूम है ये काम तो होने से रहा,
ज़िंदगी में मुझे आराम तो होने से रहा,,
ये बुराई भी मेरे नाम लिखी जाएगी,
तू मेरे इश्क़ में बदनाम तो होने से रहा,,

मध्य प्रदेश से पधारे मशहूर हास्य कवि बुद्धिप्रकाश दाधीच का ये अंदाज़ लोगों ने बहुत पसंद किया-

मुस्कुराहट के दम पर गम को सीना जान गए,
पीकर के भी जो न बहके समझो पीना जान गए।
दर्द और कड़वे वचन भी जब सहन होने लगे,
तब समझ लेना कि ‘बुद्धि’अब तुम जीना जान गए।।

कवयित्री अंजू जैन ने शहीदों को ये गीत समर्पित किया-

विजय गाथा शहीदों की यह हिंदुस्तान गाता है
उन्हीं की ही बदौलत आज आजादी से नाता है
बड़ी ही शान से लहरा रहा है यह तिरंगा जो
इन्हीं बलिदानियों के शौर्य के किस्से सुनाता है

चिराग़ जैन को इन पंक्तियों पर वाह वाही मिली-

त्याग दी हर कामना, निष्काम बनने के लिए
तीन पहरों तक तपा दिन शाम बनने के लिए
घर, नगर, परिवार, ममता, प्रेम, अपनापन, दुलार
राम ने खोया बहुत, श्रीराम बनने के लिए

मेरठ से आई कवयित्री तुषा शर्मा ने शहीदों को इस प्रकार से नमन किया-

लब पर हंसी तो आंख में पानी लिए हुए ।
बैठे हैं आप कैसी कहानी लिए हुए।
अहसान उनका हमसे चुकाया न जाएगा,
झूले जो फांसियों पे जवानी लिए हुए।।

हास्य कवि सुनहरी लाल तुरन्त की इन पंक्तियों ने लोगों को खूब हँसाया-

साल-दर-साल तरणताल बदल देते हैं l
दाल गलती नहीं तो दाल बदल देते हैं।।
पुराने जाल अगर काम में नहीं आते l
मछलियाँ देख के हम जाल बदल देते हैं।।

हिंदी भवन समिति के अध्यक्ष ललित जायसवाल और महामंत्री सुभाष गर्ग ने सभी अतिथियों का स्वागत किया।
मुख्य रूप से मौजूद रहे जिला सूचना अधिकारी वाई पी सिंह,आशा शर्मा,राकेश छारीया,बलदेव राज शर्मा,अतुल जैन,शिवम् शर्मा,अजय जैन,दीपक भाटी,सलामत मियां,योगेश कौशिक,गोपी चंद की गरिमाई उपस्थिति रही।

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वरिष्ठ पत्रकार श्री राम की रिपोर्ट

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