महफ़िल ए बारादरी में नेपाल त्रासदी पर व्यक्त की गई व्यापक चिंता
यह समय गीत, ग़ज़ल, कविता से निकल कर पृथ्वी की चित्कार सुनने का है: गौहर गाजियाबाद। ‘महफ़िल ए बारादरी’ में अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में सुप्रसिद्ध शायर आलोक अविरल ने कहा कि इस कार्यक्रम में भावनाओं की जो नदी बहती है अंत तक पहुंचते-पहुंचते वह भावों का समंदर हो जाती है। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम … Read more