4 मार्च को रंग-गुलाल से एक-दूसरे को होली की शुभकामनाएं दें

गाजियाबाद। सिद्धपीठ श्री दूधेश्वर नाथ मठ महादेव मंदिर के पीठाधीश्वर जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता एवं दिल्ली संत महामंडल के अध्यक्ष महंत नारायण गिरि ने कहा कि इस बार होली के पर्व को लेकर बहुत संशय है। महाराजश्री ने कहा कि होलिका दहन पूर्णिमा की रात को होता है। पूर्णिमा तिथि 2 मार्च को शाम 05 बजकर 55 मिनट से शुरू होगी और 3 मार्च को शाम 05 बजकर 07 मिनट तक रहेगी। रात्रि में पूर्णिमा तिथि 2 मार्च को रहेगी, मगर 2 मार्च को जैसे ही शाम 05 बजकर 55 मिनट से पूर्णिमा तिथि शुरू होगी, उस पर भद्रा का साया भी लग जाएगा। भद्रा काल में होलिका दहन नहीं किया जा सकता है। भद्रा यदि पाताल या आकाश में हो तो पृथ्वी पर उसका असर नहीं माना जाता है, लेकिन इस बार भद्रा पृथ्वी पर ही है और भद्रा में होलिका दहन करना स्वयं, परिवार, समाज व देश के लिए अनिष्टकारी साबित हो सकता है।
महंत नारायण गिरि महाराज ने कहा कि यदि भद्रा मध्यरात्रि तक हो, तो भद्रा पुच्छ के समय दहन किया जा सकता है, मगर यह समय 2 मार्च की रात्रि 12.21 बजे के बाद होगा और उस समय तक लोग सो गये होते हैं। 3 मार्च को चंद्रग्रहण है और चंद्रग्रहण का सूतक काल 9 घंटे पहले शुरू हो जाता है। चंद्रग्रहण 3 मार्च को दोपहर 03 बजकर 21 मिनट पर प्रारंभ होकर शाम को 06 बजर 46 मिनट पर समाप्त हो जाएगा। इसी समय सूतक काल भी समाप्त हो जाएगा। दिल्ली में चंद्रहण शाम 6 बजकर 22 मिनट से शाम 6 बजकर 47 मिनट तक दिखाई देगा।
चंद्रग्रहण का सूतक काल शुरू होने से पहले ही स्नान आदि कर ठाकुर जी का या अपने ईष्ट का श्रृंगार कर उन्हें भोग लगाकर खुद भी भोजन कर लें। चंद्रग्रहण के दौरान हरि नाम स्मरण करे। चंद्रग्रहण खत्म होने के बाद स्नान आदि कर रात्रि 8 बजे के बाद होलिका दहन करें और 4 मार्च को रंगोत्सव में भाग लें। 3 मार्च को पूर्णिैमा तिथि 05 बजकर 07 मिनट पर समाप्त हो जाएगी लेकिन तब भी प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा तिथि रहेगी। ऐसे में होलिका दहन और पूजन करना शुभ रहेगा।


