
पुराने जमाने में राजा के मरने का मतलब होता था जीत, शायद यही सोच कर इसराइल और अमेरिका ने सोचा था वो ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई को मारने पर ईरान समर्पण कर देगा, पर ईरान ने अपने दुश्मनों को गलत साबित कर दिया और जिस प्रकार का जवाब ईरान ने दिया है उससे अमेरिका व इजरायल को भारी झटका लगा, पिछले चार दिनों से जिस प्रकार ईरान इजरायल व अमेरिका को जवाब दे रहा है उसकी उम्मीद उसके सहयोगियों को भी नहीं थी खासकर अरब के देश को जो की अमेरिका को अपना बेस देकर अपने को सुरक्षित समझ रहे थे उन्हें भी भारी झटका लगा है।
ईरान ने दिखा दिया कि लड़ने का जज्बा हो तो सुपर पावर को भी टक्कर दी जा सकती है, तुलनात्मक रूप से देखें तो ईरान, अमेरिका व इजरायल के आगे कहीं नहीं टिकता परंतु जब बात अपने अस्तित्व पर आए तो बहादुर कौम मैदान नहीं छोड़ती, जिस प्रकार ईरान जवाब दे रहा है वो आश्चर्यजनक है। पूरी दुनिया को समझाना पड़ेगा की किसी राष्ट्र को जबरदस्ती नहीं झुकाया जा सकता। बलपूर्वक किसी राष्ट्र को दबाया जाएगा तो उसका भी नुकसान होगा इजरायल। अमेरिका ने सोचा था की ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई को मारते ही ईरान की जनता विद्रोह कर देगी परंतु हुआ इसका उल्टा, ईरान की जनता अपने रहबर से नाराज हो सकती है परंतु वो ये कभी पसंद नहीं करेगी कि उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष को कोई विरोधी मार डाले यह एक स्वाभिमानी कौम की निशानी है।
जहां तक अमेरिका की बात है तो ट्रंप ने साबित किया वो किसी के नहीं है पूर्व में सभी देशों पर टैरिफ लगाकर उन्होंने दिखा दिया कि वो सिर्फ अपने हित सोचते हैं बाकी दुनिया से उन्हें कोई मतलब नहीं, भारत के साथ भी ट्रंप का यही व्यवहार रहा दुनिया को ये समझना पड़ेगा कि ट्रंप की नीतियों का खुलकर विरोध नहीं किया तो वो दुनिया के लिए खतरा बन जाएंगे। अमेरिका का इतिहास रहा है कि चाहे वो इराक हो या वेनेजुएला , झूठे आरोप लगाकर किसी राष्ट्र को नष्ट करना या सत्ता को बदलना।
ईरान के बारे में कहा गया कि वो परमाणु बम बना रहा जबकि विश्व ऊर्जा संगठन ने इनकार किया है फिर कहा गया कि ईरान ने ट्रंप को मारने की कोशिश की जिस पर खुद अमेरिका की जनता को भी विश्वास नहीं है, भारत को ट्रंप पर विश्वास नहीं करना चाहिए, इसका परिणाम हम अपने नागरिकों को बेड़ियों में देख चुके हैं ट्रंप की वजह से ही हमारा सबसे निकट मित्र रूस को भी हम खोने जा रहे हैं, जिसने हमेशा हमारी मदद की। ईरान भी भारत का सांस्कृतिक मित्र रहा है। जेंद अवेस्ता और ऋग्वेद का उद्गम एक ही है, ईरान ने हमें तेल दिया, अपना बंदरगाह चाहबार भी दिया, आज संकट के समय यदि हमने ईरान का साथ नहीं दिया तो यह भविष्य में भारत के लिए हानिकारक होगा, हमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई को श्रद्धांजलि देनी चाहिए साथ उन निर्दोष 160 बच्चों की शहादत को भी नमन करना चाहिए जिसका कोई दोष नहीं था।



