अतिथि बनने को आतुर रहते थे राजनेता एवं आलाधिकारी

1976 में गाजियाबाद जिला बनने के बाद सन 2000 तक मेरी ( सुशील कुमार शर्मा) सदारत में जनपद के पत्रकारों की एक मात्र सक्रिय पत्रकार संस्था “गाजियाबाद जर्नलिस्ट्स क्लब” द्वारा होली पर वृहदस्तर पर “होली मिलन समारोह” का आयोजन किया जाता रहा। जनपद के तमाम आला अधिकारी और राजनेता इस आयोजन के निमंत्रण के लिए उत्सुक रहते थे।

इस कार्यक्रम के वृहद मंच पर एक ओर जनपद के पदेन पुलिस व प्रशासनिक अथिकारियों को बैठाया जाता था तथा दूसरी ओर पदेन और पूर्व राजनेता जिनमें सफेदपोश अपराधी भी होते थे, बैठते थे। इस आयोजन के मंच पर बैठने के लिए बहुत से धनकुबेर लालायित रहे। इप्टा के रंगकर्मीयों से मंच पर नाटक की प्रस्तुति और एक उस समय के चर्चित फिल्मी गाने पर पैरोडी की प्रस्तुति होती थी। जिसमें वर्ष भर उनके बारे में चर्चित किस्सों को थडल्ले से कहा जाता था। डेढ से दो हज़ार की भीड उन्हे शर्मसार होते देख आनन्दित होती थी।

दिवंगत कवि कृष्ण मित्र व वरिष्ठ पत्रकार रवि अरोडा के संचालन में यह आयोजन अविस्मरणीय रहा। पत्रकार राकेश शर्मा और उनके साले साहब उमा कांत दीक्षित का नाटक जमूरे- मदारी भी विशेष आकर्षण रहा। पैरोडी बनाने में प्रख्यात शायर मासूम गाजियाबादी और नाटिका के मुख्य पात्रों में निशी कांत दीक्षित ( जो अब मुंबई फिल्म नगरी के जानेमाने सह अभिनेता हैं) व रंगकर्मी व अभिनेता संदीप सिंहवाल का उल्लेख भी जरूरी है। कमला गैस एजेंसी के मालिक वरिष्ठ पत्रकार अरविन्द मोहन शर्मा का उल्लेख भी जरूरी है जिनके संस्थान में एक माह तक आयोजन की रिहर्सल होती थी।

उन्हीं की पहल पर 20 वर्ष बाद 2020 में रामलीला मैदान, जी टी रोड के जानकी भवन सभागार में एक बार पुन: आयोजन किया गया। तब के बाद दो वर्ष तक कोरोना का आतंक रहा। जिसके बाद फिर आयोजन नहीं हो पाया।


