आरटीई के तहत गरीब बच्चों को दाखिला न देने वाले स्कूलों पर सख्ती जरूरी, अधिग्रहण का विधेयक लाने की मांग

नोएडा-ग्रेटर नोएडा सहित कई क्षेत्रों में नामचीन संस्थानों पर नियम उल्लंघन के आरोप, अभिभावकों में बढ़ रही नाराजगी

आरटीई के तहत चयनित आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को नामचीन शिक्षण संस्थाओं द्वारा दाखिला न देने की शिकायतें आम होने के बाद भी सरकार द्वारा कोई खास सख्ती नही बरते जाने से अभिभावक खासे नाराज नजर आ रहे हैं। प्रतिवर्ष शिक्षण सत्र प्रारंभ होते ही नामचीन शिक्षण संस्थाओं द्वारा आरटीई के तहत चयनित गरीब बच्चों को दाखिला न देने की खबरें अखबारों और सोशल मीडिया में पढ़ने और सुनने को मिलती हैं।

जनपद गौतम बुध नगर के नोएडा ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में स्थित नामचीन शिक्षण संस्थाओं के विषय में तो यहां तक शिकायत मिलती रही हैं कि आरटीई के तहत चयनित बच्चों के लिए दाखिले हेतु पहुंचे अभिभावकों को स्कूल गेट में प्रवेश करने तक पर रोक लगा दी जाती है। बड़े-बड़े लोगों की इन शिक्षण संस्थाओं में कार्यरत प्रिंसिपल और एडमिनिस्ट्रेशन स्कूल संचालकों की शह पर इतना बेखौफ होकर सरकारी नियम कायदों का उल्लंघन करते हैं कि अधिकारियों और राजनेताओं का फोन उठाना भी मुनासिब नहीं समझता। अगर फोन उठा भी लिया तो उनके कहे की अवहेलना करना इनके लिए आम बात है।

ऐसा भी नहीं है कि इन शिक्षण संस्थानों की शिकायतों से प्रदेश के शिक्षा मंत्री और सरकार अवगत न हों क्योंकि आरटीई के तहत चयनित बच्चों को दाखिला न देने की शिकायत विधानसभा सत्र के दौरान भी विधायक गण कई बार उठाते रहे हैं। लेकिन सरकारी आदेशों का उल्लंघन करने वाले इन नामचीन शिक्षण संस्थानों के विरुद्ध अभी तक सरकार कोई ठोस कार्यवाही करती नजर नहीं आई है। इसी वजह से जिला स्तरीय शिक्षा अधिकारी भी इन नामचीन शिक्षण संस्थानों के विरुद्ध कोई बड़ी कार्रवाई करते हुए हिचकते हैं। इसीलिए सरकार द्वारा बनाए गए शिक्षा का अधिकार अधिनियम को सरकार द्वारा ही संरक्षित न कर पाने से अभिभावकों का आरटीई से विश्वास उठ रहा है।

नामचीन शिक्षण संस्थानों द्वारा कानून का खुला उल्लंघन करने से अब वह समय आ गया है कि दाखिला न देने वाली नामचीन शिक्षण संस्थाओं के विरुद्ध अधिग्रहण करने जैसा विधेयक विधानसभा में पारित कराना होगा ताकि कानून का उल्लंघन करने वाले शिक्षण संस्थानों में भय व्याप्त हो सके तभी आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को आरटीई का लाभ मिल सकेगा।

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कर्मवीर नागर प्रमुख

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