22 मार्च विश्व जल दिवस पर विशेष
अस्तित्व की जंग लड़ती हिंडन : कागजों में कैद बचाने वाले प्रोजेक्ट

कभी पश्चिमी उत्तर प्रदेश की पहचान और कई जनपदों की जीवन रेखा कभी मेरे अस्तित्व पर खुशहाली आस्था जन सैलाब उमड़ता था मेरे जल में जीवन रहता था। आज मैं खुद अपने अस्तित्व के लिए जंग लड़ रही हूं। अनेकों नगरों के बीचों बीच एवं जंगलों के बीचो-बीच बहने वाली मैं अब जलकुंभी के प्रकोप से घट रही हूं जैसे किसी ने मेरी सांसे थमा दी हो। मुझे सबसे ज्यादा पीड़ा तब होती है जब नगर के दर्जनों से भी अधिक नाले बिना रुके मुझ में गिरते हैं। आज गंदे नाले में तब्दील होती जा रही हूँ।
मैं सब देखती हूं सहती हूं लेकिन कुछ कह नहीं पाती। जो कभी शुद्ध जल धारा हुआ करती थी आज इस दशा में पहुंच गई है। मेरे अस्तित्व को बचाने के लिए बहुत से संगठन बहुत से लोग खड़े तो हुए लेकिन मेरी समस्या और बद से बदतर होती चली गई। कुछ समय पहले जब सभी नदियों को साफ करने का अभियान चल रहा था तो कुछ समय के लिए मैं भी सवर उठी थी लेकिन यह खुशी ज्यादा दिन तक नहीं देख सकी। नालों व बड़ी-बड़ी फैक्ट्री एवं अन्य कारखाने से आने वाला गंदा पानी एवं गंदगी ने फिर मुझे इस हाल में ला खड़ा कर दिया।
मेरे घावों पर मरहम लगाने के लिए एक उम्मीद जगी थी एसटीपी। सोचा था अब मेरे भीतर गिरने वाले गंदे पानी को पहले साफ किया जाएगा फिर मुझे राहत मिलेगी। जनपद के शासन प्रशासन के अधिकारियों ने योजनाएं तो बहुत बनाई लेकिन वह योजनाएं सिर्फ कागजों में ही कैद है मैं आज भी उसी का इंतजार करती हूं। मेरे किनारे आज भी कई शहरों में जलविहार मेला लगता है आस्था का सैलाब उमड़ता है लेकिन विशेष दिवसों पर। किंतु मेरे भीतर भारी गंदगी और जलकुंभी श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचती है। मेरे ठहरे हुए पानी में मच्छर पनपते हैं बड़ी-बड़ी बीमारियों खतरा बन चुकी हैं। मैं खुद को हर दिन और कमजोर महसूस करती हूं। बरसात के मौसम में कभी कभार मेरी सतह से जलकुंभी हटाई जाती है लेकिन यह इलाज भी अस्थाई रहता है। मेरी असली समस्या विभिन्न शहरों का नालों का पानी सीवर का पानी और बड़ी-बड़ी फैक्ट्री और कारखानों का गंदा पानी व गंदगी अब भी वैसे ही मेरे अस्तित्व को खत्म करने में रात दिन लगे हुए हैं।
मैं आप सभी से हाथ जोड़कर यह निवेदन करती हूं कि 22 मार्च को विश्व जल दिवस है इस अवसर पर मेरा आप सभी प्रशासनिक लोगों से निवेदन एवं इस नगर के प्रत्येक व्यक्ति से यह कहना चाहती हूं मुझे बचाना है तो सिर्फ सफाई नहीं सोच भी आपको बदलनी होगी। जब तक गंदे नाले को मुझे अलग नहीं किया जाएगा बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियां कारखाने कंपनियां गंदा पानी मुझसे अलग नहीं किया जाएगा तब तक मेरा पूरा पुनर्जन्म संभव नहीं है। अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ते हुए अपने आप को और कमजोर महसूस करती हुई आपकी आस्था की हिंडन नदी।



