युवाओं को नशामुक्ति और आध्यात्मिकता से जोड़ने की पहल

गाजियाबाद। इस्कॉन (इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस) के 60 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में इस्कॉन गाजियाबाद ने पहली बार ‘हरे कृष्ण प्रश्नोत्तरी’ ऑनलाइन क्विज़ प्रतियोगिता का शुभारंभ किया। बुधवार को मंदिर परिसर में आयोजित प्रेस वार्ता में प्रतियोगिता की रूपरेखा साझा करते हुए पदाधिकारियों ने इसे केवल एक क्विज़ नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कार और सकारात्मक जीवनशैली से जोड़ने वाला जनजागरण अभियान बताया।
प्रेस वार्ता में मंदिर अध्यक्ष आदिकर्ता प्रभु, उपाध्यक्ष धनंजय जगन्नाथ प्रभु, जनरल मैनेजर अभिराम प्रभु, पब्लिक रिलेशंस एवं कम्युनिकेशंस हेड दयालु कन्हाई दास तथा आयोजन के तकनीकी सहयोगी सेटू100 के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

वक्ताओं ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण द्वारा प्रदत्त श्रीमद्भगवद्गीता का ज्ञान आज भी मानव जीवन के लिए उतना ही प्रासंगिक है जितना हजारों वर्ष पूर्व था। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में युवा नशे, तनाव, अवसाद, डिजिटल व्यसन और नैतिक मूल्यों के ह्रास जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में श्रीकृष्ण की शिक्षाएं उन्हें सही दिशा, आत्मविश्वास, चरित्र निर्माण और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रदान कर सकती हैं।
आयोजकों के अनुसार प्रतियोगिता को तीन स्तर—लेवल-1, लेवल-2 और लेवल-3—में आयोजित किया जाएगा, ताकि सभी आयु वर्ग के प्रतिभागी अपनी ज्ञान क्षमता के अनुसार इसमें भाग ले सकें। प्रतियोगिता पूरी तरह ऑनलाइन होगी और इसके लिए पंजीकरण शुरू हो चुके हैं। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार बाद में चरणबद्ध तरीके से तीनों स्तरों की परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी।
प्रेस वार्ता में बताया गया कि यह पहल भारत सरकार के ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ की भावना को भी मजबूत करेगी। आयोजकों का मानना है कि जब युवा श्रीकृष्ण की शिक्षाओं, भक्ति और सत्संग से जुड़ेंगे तो वे स्वाभाविक रूप से नशे और अन्य बुरी आदतों से दूर रहकर स्वस्थ एवं उद्देश्यपूर्ण जीवन की ओर अग्रसर होंगे।
इस्कॉन गाजियाबाद ने विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों, सामाजिक संगठनों और युवाओं से इस आध्यात्मिक ज्ञान अभियान से जुड़ने तथा अधिक से अधिक लोगों को प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया। साथ ही कहा कि इस्कॉन के 60 वर्षों की यात्रा केवल मंदिर निर्माण तक सीमित नहीं रही, बल्कि मानव जीवन में आध्यात्मिक जागरूकता, नैतिक मूल्यों और श्रीकृष्ण भावनामृत के प्रसार का निरंतर अभियान रही है।
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