साईं उपवन, सिटी फ़ॉरेस्ट में कचरा फेंकने से 70 हजार पेड़ नष्ट

NGT ने इसी मॉनसून में फ़ॉरेस्ट में पेड़ लगाने का दिया निर्देश


गाजियाबाद। जीटी रोड स्थित साईं उपवन सिटी फ़ॉरेस्ट में नगर निगम द्वारा लगातार पिछले 13 सालो से कचरा फेंकने और जलाने, वहाँ से गुज़रने वाले स्टॉर्म वॉटर ड्रेन (तूफ़ानी पानी की निकासी वाली नाली) के बंद होने और पिछले कुछ सालों से सीवेज/गंदे पानी में डूबे रहने का संज्ञान लेते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने गाज़ियाबाद नगर निगम को निर्देश दिया है कि वे मौजूदा मॉनसून सीज़न के दौरान फ़ॉरेस्ट में पेड़ लगाने की संभावना पर विचार करें और 16 सितंबर 2026 से पहले इस बारे में जानकारी देते हुए एक हलफ़नामा जमा करें।

कोर्ट ने 19.03.2026 को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, उत्तर प्रदेश सरकार, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, ज़िला मजिस्ट्रेट, वन विभाग, गाज़ियाबाद विकास प्राधिकरण और गाज़ियाबाद नगर निगम को नोटिस जारी किए थे। ट्रिब्यूनल ने यह नोटिस राजेंद्र त्यागी की याचिका पर जारी किया, जो पांच बार म्युनिसिपल कॉरपोरेटर और गाज़ियाबाद विकास प्राधिकरण के बोर्ड सदस्य रहे हैं।

अपनी याचिका में एडवोकेट आकाश वशिष्ठ के ज़रिए पेश हुए त्यागी ने कहा कि ‘साईं उपवन’ के अंदर गैर-वन गतिविधियों के कारण लगभग 70,000 पेड़ पूरी तरह सूखकर नष्ट हो गए हैं। ‘साईं उपवन’ को मास्टर प्लान 2021 और उसके बाद मास्टर प्लान 2031 (जो अभी लागू है) में ‘सिटी फॉरेस्ट’ के तौर पर चिह्नित किया गया है। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील आकाश वशिष्ठ ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का यह दावा पूरी तरह गलत है कि वन क्षेत्र में अब कोई कचरा नहीं बचा है।

ऐड. आकाश वशिष्ठ ने तर्क दिया की “मिट्टी में अभी भी भारी मात्रा में पुराना कचरा (लेगेसी वेस्ट) मिला हुआ दिखाई देता है और इसे ठीक करने के लिए कोई उपाय नहीं किया गया है। कम से कम उन्हें इसी मॉनसून सीज़न में पेड़ लगाने का काम करना चाहिए ताकि क्षतिग्रस्त जंगल को कुछ हद तक बहाल किया जा सके। वरना सारी कोशिशें बेकार चली जाएंगी।

याचिका में कहा गया है की शहर की तरफ से आने वाले और साईं उपवन से होकर गुजरने वाले स्टॉर्म वॉटर ड्रेन (बरसाती नाले) में सीवेज/गंदा पानी ओवरफ्लो हो रहा है और बिना ट्रीट किया हुआ सीवेज/गंदा पानी/एफ्लुएंट्स आखिर में साईं उपवन के पश्चिमी छोर पर हिंडन नदी में गिरता है। स्टॉर्म वॉटर ड्रेन सॉलिड वेस्ट से भरा हुआ है और साईं उपवन का एक बड़ा हिस्सा सीवेज/गंदे पानी में डूबा हुआ है। इसमें कहा गया है कि 2012 से अब तक साईं उपवन को डंपिंग ग्राउंड बना दिया गया है।

लगभग 200 एकड़ में फैला ‘साईं उपवन’ गाज़ियाबाद शहर का सबसे बड़ा सिटी फ़ॉरेस्ट है। पूर्व पार्षद राजेंद्र त्यागी ने 2012 में इलाहाबाद हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था, क्योंकि कचरा फेंकने और जलाने, सीवेज के पानी में डूबने, मवेशियों के चरने, कैला भट्टा जैसे आस-पास के इलाकों के लोगों की घुसपैठ और लकड़ी माफिया द्वारा पेड़ों की अवैध कटाई के कारण साईं उपवन के हज़ारों पेड़ खत्म हो गए थे। NGT में अपनी याचिका में त्यागी ने कहा है कि साईं उपवन सिटी फ़ॉरेस्ट गाज़ियाबाद के लोगों के लिए ‘ग्रीन लंग्स’ (साँस लेने के लिए शुद्ध हवा का स्रोत) का काम करता है। गाज़ियाबाद जैसे बहुत ज़्यादा प्रदूषण वाले शहर में, साईं उपवन ताज़ी हवा देने और शहर के लाखों लोगों को स्वास्थ्य लाभ पहुँचाने का एक बहुत ज़रूरी ज़रिया है।

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वरिष्ठ पत्रकार श्री राम की रिपोर्ट

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