
नई दिल्ली। भवानीज़ प्रसन्नालयठ ट्रस्ट द्वारा कार्तियायनी सोशियो-कल्चरल कॉम्प्लेक्स, मयूर विहार नई दिल्ली में आयोजित एकल भरतनाट्यम प्रस्तुति को दर्शकों और कला-विशेषज्ञों की भरपूर सराहना मिली। वर्ष प्रतिपदा और नवरात्रि के शुभ अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में नृत्यांगना ए. सात्विका ने अपने असाधारण नृत्य- कौशल, भावपूर्ण अभिनय, सटीक मुद्राओं और लयबद्ध पदचाप से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

ओ.पी. जिंदल लॉ कॉलेज से स्नातक और पेशे से फोटोग्राफर सात्विका अपनी कला में एक अनूठा और बहुआयामी दृष्टिकोण लेकर आती हैं। 15 वर्ष पूर्व मुंबई में अपना अरंगेत्रम पूरा करने के बाद से उन्होंने भारत भर के विभिन्न मंचों पर प्रस्तुति देते हुए अपनी एक समृद्ध पहचान बनाई है। अपनी गुरु भवानी अनंतरामन के मार्गदर्शन में, सात्विका ने तकनीकी दक्षता और भावाभिव्यक्ति का प्रभावशाली संगम प्रस्तुत किया। पुष्पांजलि, राग कल्याणी पर आधारित वर्णम, आदि शंकराचार्य की रचना पर आधारित श्लोक, संत मीराबाई के भजन ‘चलो मन गंगा यमुना तीर’ के साथ-साथ तिल्लाना और मंगलम के माध्यम से, उन्होंने भक्ति,आध्यात्मिकता और भारतीय सांस्कृतिक परंपरा को सजीव कर दिया।

प्रख्यात कलाकारों की संगीतमय संगत ने इस प्रस्तुति को और भी समृद्ध बना दिया। सुधा रघुरामन के भावपूर्ण गायन को बाँसुरी पर जी. रघुरामन और मृदंगम पर एम.वी. चंद्रशेखर की सटीक लय का बेहतरीन साथ मिला। मंच संचालक (मास्टर ऑफ सेरेमनीज़) के रूप में ए. शिवा ने इस संगीतमय सुबह के निर्बाध प्रवाह को बनाए रखा। उनके आकर्षक विवरण ने प्रत्येक प्रस्तुति के लिए मूल्यवान संदर्भ प्रदान किया और कार्यक्रम की बारीकियों के माध्यम से दर्शकों का कुशलतापूर्वक मार्गदर्शन किया।
भवानीज़ प्रसन्नालय ट्रस्ट के न्यासी वी. अनंतरामन और ए. शिवा के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम ने गुरु-शिष्य परंपरा की विरासत का उत्सव मनाया। अपने नाम को सार्थक करते हुए ‘रसा’ ने उपस्थित रसिकों को एक गहरी रसानुभूति प्रदान की।


